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Valentine's Day 2018: इश्क करने वालों जरा खुद को संभालों

Posted at: Feb 14 , 2018 by Dilersamachar 10113

दिलेर समाचार, नई दिल्ली: Valentine's Day बेशक नए दौर का इश्क के जश्न का मौका है. लेकिन उर्दू शायर मिर्जा गालिब ने इश्क को लेकर ऐसी शायरी कही है जो न सिर्फ आम  जिंदगी में रच-बस गई है बल्कि बॉलीवुड से लेकर टेलीविजन तक पर इसका खूब इस्तेमाल भी होता आया है. मिर्जा गालिब की इश्किया शायरी का इस्तेमाल तो हर प्यार करने वाले ने अपनी जिंदगी में कभी न कभी किया ही होगा क्योंकि कम शब्दों में मारक बात कहना मिर्ज़ा की आदत थी और वे अपनी असल जिंदगी में भी बहुत ही प्यारी शख्सियत थे. वे मस्त रहते थे और अपनी ही दुनिया में मशगूल रहने वाले शख्स थे. दिलचस्प तो यह कि उनकी शायरी का फिल्मों में खूब इस्तेमाल भी हुआ है.


इश्क पर जोर नहीं...वाला शेर तो शाहरुख खान की फिल्म 'दिल से...' के गाने में आ चुका है. यह गाना काफी फेमस हुआ था और शाहरुख खान का अंदाज भी इसमें खूब पसंद किया गया था. बॉलीवुड और टेलीविजन पर उनके ऊपर ज्यादा काम नहीं हुआ है. बॉलीवुड में सोहराब मोदी की फिल्म ‘मिर्जा गालिब (1954)’ यादगार थी और टेलीविजन पर गुलजार का बनाया गया टीवी सीरियल ‘मिर्जा गालिब (1988)’ जेहन में रच-बस गया. फिल्म में जहां भारत भूषण ने लीड किरदार को निभाया तो टीवी पर नसीरूद्दीन शाह ने मिर्जा गालिब को छोटे परदे पर जिंदा किया. मिर्जा गालिब के कुछ रोमांटिक शेरः

इश्क़ ने 'गालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के

उन के देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

इश्क पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'गालिब'
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने


आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

तुम सलामत रहो हजार बरस
हर बरस के हों दिन पचास हजार

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का 
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले 

ये न थी हमारी किस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिजार होता

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