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August 7 2020 02:13 PM

जब पांडवों को खाना पड़ा अपने ही पिता का मांस

Posted at: Aug 9 , 2017 by Dilersamachar 5436

दिलेर समाचार, हम आजतक महाभारत से जुड़ी कई घटना सुन या पढ़ चुके है। लेकिन कई ऐसी घटनाएं जिनके बारें में आपने कभी नही सुना होगा। महाभारत हिंदू धर्म का प्रमुयक काव्य ग्रंथ है। इस ग्रंथ को हिन्दू धर्म का पंचम वेद माना जाता है।

इस ग्रंथ को वेदव्यास जी ने लिखा था। इसमें कई ऐसी कथाएं लिखी है जिनके बारें में हम जानकर चौक जाएगें। साथ ही सोचेगे कि ऐसा कैसे हो सकता है। आज हम अपनी खबर में महाभारत से जुडी ऐसा घटना के बारें में बता रहे जिसे जानकर आपको यकीन नही होगा।

महाभारत से जुडी यह घटना उस समय की जब पांचो पांडव के पिता पांडु की मृत्यु हुई थी। उनके शरीर का मांस उनके पुत्रों ने खाया था। इस बात को जानने के लिए हम पांडु के जीवित होने के समय में जाना होगा। इसके अनुसार पांच पांडव युधिष्ठर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव थे। इनमे से युधिष्ठर, भीम और अर्जुन की माता कुंती थी और नकुल और सहदेव की माता माद्री थी।

माना जाता है कि पांडु इन पांचों पुत्रों के पिता तो थे लेकिन इनका जन्म पांडु के वीर्य तथा मातओं के गर्भ से नही हुआ था, क्योंकि पांडु को किसी ऋषि ने श्राप दिया था कि अगर वो किसी भी स्त्री से शारीरिक संबंध बनाएगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। जिसके कारण उन्होनें कभी भी कुंती और माद्री से शारिरीक संबंध नही बनाए थे। इसीकारण पांडु के निवेदन पर पांडवों का माता कुंती और माद्री ने भगवान का आहवान करके प्राप्त किए थे।

इसके बाद जब पाण्डु की मृत्यु हुई तो उसके मृत शरीर का मांस पांचों भाइयों ने मिल कर खाया था। इसके पीछें कारण था कि पांडु खुद चाहते थे कि उनके पुत्र उनका मांस खाएं, क्योंकि उसके पुत्र उसके वीर्ये से पैदा नहीं हुए थे। जिसके कारण पांडु का ज्ञान, कौशल उसके पुत्रों में नहीं आ पाया था। इसी कारण उसने अपनी मृत्यु पूर्व ऐसा वरदान मांगा था कि उसके बच्चे उसकी मृत्यु के पश्चात उसके शरीर का मांस मिल बांट कर खाएं जिससे उसका ज्ञान बच्चों में स्थानांतरित हो जाए।

पांडवो द्वारा पिता का मांस खाने के विषय में दो मान्यता प्रचलित है। इसके अनुसार पहली मान्यता है कि पांचो भाइयों ने मिल बांट कर मांस खाया था, लेकिन सबसे ज्यादा मांस सहदेव ने खाया था।

जबकि एक अन्य मान्यता के अनुसार सिर्फ सहदेव ने पिता की इच्छा का पालन करते हुए उनके मस्तिष्क के तीन हिस्से खाए। पहले टुकड़े को खाते ही सहदेव को इतिहास का ज्ञान हुआ, दूसरे टुकड़े को खाने पर वर्तमान का और तीसरे टुकड़े को खाते ही भविष्य का ज्ञान हो गया। सबसे बड़ा यही कारण है कि सहदेव अपने सभी भाइयों में सबसे अधिक ज्ञानी था। साथ ही वह भविष्य में होने वाली घटनाओं को भी देख लेता था।

सहदेव के भविष्य जानने के कारण उसने महाभागत का युद्ध देख लिया था। इसी कारण श्री कृष्ण को डर था कि वो और किसी से यह राज न बता दें। इसी कारण श्री कृष्ण ने सहदेव को यह श्राप दे दिया था कि अगर वह किसी से यह बात बोलेगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसी कारण उसने किसी को यह बात नही बताई थी।

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