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September 21 2019 06:36 PM

जीनत अमान फिर आ रही हैं दर्शकों का दिल जीतने

Posted at: Jul 9 , 2019 by Dilersamachar 5397

सुभाष शिरढोनकर

19 नवंबर, 1951 को मुस्लिम पिता और हिन्दू मां की संतान के रूप में जन्मी बाॅलीवुड की बेहद हसीन और ग्लैमरस एक्ट्रेस जीनत अमान के पिता अमानुल्ला ’मुगल-ए-आजम’ और ’पाकीजा’ जैसी कई कामयाब फिल्मों के पटकथा लेखक रहे हैं।

जीनत अमान जब महज 13 साल की थी, पिता का निधन हो गया। उसके बाद उनकी मां नेे एक जर्मन व्यक्ति के साथ शादी कर ली। इस तरह जीनत, अपनी मां और सौतेले पिता के साथ जर्मनी चली गई।

करीब 16 साल जर्मनी में बिताने के बाद जीनत अमान वापिस मुंबई लौट आईं। यहां सेंट जेवियर काॅलेज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जीनत अमान ने ’फेमिना’ के साथ जुड़ते हुए बतौर पत्राकार काम शुरू किया लेकिन बहुत जल्दी माॅडलिंग की ओर रूख किया। वह ’मिस इंडिया’ कांटेस्ट की रनरअप रहने के साथ 1970 में ’मिस ऐशिया पेसिफिक’ की विजेता बनीं।

जीनत अमान को पहली बार देव आनंद के अपोजिट, ’द ऐविल विदिन’ (1970) में अवसर मिला। इसके बाद वह किशोर कुमार के अपोजिट ’हंगामा’ (1971) और ओपी रल्हन निर्देशित ’हलचल’ (1971) में कबीर बेदी के साथ नजर आईं।

देव आनंद की ’हरे रामा हरे कृष्णा’ (1971) में देव साहब की हिप्पी बहन जसबीर उर्फ जैनिस के किरदार में पहली बार जीनत अमान को पहचान मिली। इस किरदार के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला।

पूरी तरह पश्चिमी रंग में ढली जीनत अमान को, ’हरे रामा हरे कृष्णा’ (1971) के बाद कई बड़े मेकर्स की फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। जीनत ने अपनी फिल्मों में बेहद आधुनिक किरदार निभाये। जीनत अमान का ग्लैमरस कुछ ऐसा था जिसने उन्हें हमेशा, परंपरागत नायिका की श्रेणी से दूर रखा।

राज कपूर की ’सत्यम शिवम सुंदरम’ (1978) में जीनत अमान के कुछ अंग प्रदर्शन वाले दृश्यों को लेकर काफी हंगामा हुआ। उन्होंने ’इंसाफ का तराजू’ (1980), ’कुर्बानी’ (1980), ’दोस्ताना’ (1980), ’लावारिस’ (1981), और ’महान’ (1983) जैसी ढेर सारी कामयाब फिल्में दीं।

 फिरोज खान की ’कुर्बानी’ (1980) में जीनत अमान का ग्लैमर कुछ ऐसा था जिसके असर में उस वक्त कईयों के होश फाख्ता हो गये थे। उनकी वह फिल्म 80 के दशक की सबसे बड़ी ब्लाॅक बस्टर साबित हुई।

बलात्कार जैसे विषय पर बनी बी.आर.चोपड़ा की ’इंसाफ का तराजू’ (1980) में जीनत अमान ने एक बेहद बोल्ड किरदार निभाया था। इसमें लाजवाब अदाकारी के लिए जीनत को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्राी का फिल्मफेयर का नाॅमिनेशन मिला।

70 और 80 के दशक में खूबसूरती, ग्लैमर और नाजो अदा का पर्याय मानी जाने वाली जीनत अमान ने अमिताभ बच्चन के साथ ’डाॅन’ (1978) ’दोस्ताना’ (1980), और लावारिस (1981) जैसी कई हिट फिल्में कीं।

1985 में जब जीनत अमान अपने कैरियर के उफान पर थीं, उन्होंने हिन्दी फिल्मों के केरेक्टर आर्टिस्ट मजहर खान के साथ शादी कर ली। 1998 में मजहर की मृत्यु हो गई। मजहर से उन्हें दो बेटे हैं। जीनत अमान काफी समय तक बड़े पर्दे से दूर रही है लेकिन एक बार फिर वह आशुतोष गोवारिकर की ’पानीपत’ के जरिये सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखरने आ रही हैं।

1761 में अफगानियों और मराठों के बीच हुए पानीपत के तीसरे युद्ध पर आधारित ’पानीपत’ में जीनत अमान, होशियारपुर प्रांत की शासक सकीना बेगम के किरदार में नजर आएंगी। सकीना के पास पेशवा जब मदद मांगने आते हैं, तब वह पानीपत के युद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह फिल्म 06 दिसंबर को रिलीज होगी।

निर्देशक आशुतोष गोवारिकर 30 साल पहले, जीनत अमान के साथ अनंत बालानी की फिल्म ’गवाही’ में काम कर चुके हैं। उन्होंने ’पानीपत’ में जीनत को एन आखिरी वक्त में शामिल कर फिल्म का महत्त्व काफी बढ़ा दिया है।यह देखना दिलचस्प होगा कि एक लंबे अरसे बाद सिल्वर स्क्रीन पर लौट रही 68 साल की जीनत अमान किस हद तक दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हो पाती हैं। फिलहाल उनका फिल्मों में लौटना उनके फैंस के लिए किसी हंसीन सपने के पूरा होने से कम नहीं है। 

ये भी पढ़े: बढ़ता जल संकट और ‘राखुंडा’


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